देश की खातिर: जाकिर अली ‘रजनीश’ की विज्ञान कथा

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देश की खातिर: जाकिर अली ‘रजनीश’ की विज्ञान कथा

अखबार पर नजर पड़ते ही चमन एकदम से चौंक पड़ा। मोटी-मोटी हेडिंग में सबसे ऊपर कर्नल अमन के साहसिक कारनामे की खबर छपी थी, जिसमें वे शहीद हो गये थे।

समाचार के मुताबिक कल देर रात सीमा पार आतंकवादियों के प्रशिक्षण स्थल के पास एक जोरदार विस्फोट हुआ था। वह विस्फोट इतना शक्तिशाली कि उस समय वहां पर मौजूद सभी आतंकवादी मारे गये थे और तमाम गोला-बारूद नष्ट हो गया था।

इस दिल दहला देने वाली घटना के ठीक दो घन्टे बाद कर्नल अमन सीमा पर बेहोश मिले थे। उनका शरीर बुरी तरह से जल गया था। सेना को यह खबर मिलते ही उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

सेना द्वारा मिली जानकारी के अनुसार कर्नल अमन ने अपनी जान खतरे में डाल कर आतंकवादियों के गढ़ को नेस्तानाबूद कर दिया था। इस आपरेशन में ही उनका शरीर बुरी तरह से जल गया था। उनके इस साहसिक अभियान के लिए सरकार ने उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र प्रदान करने की घोषणा की थी।

Bal Vigyan katha-Desh ki khatir
पूरा समाचार पढ़कर चमन की आंखें गीली हो गयीं। उसके पिता इस दुनिया में नहीं रहे, यह उसके लिए एक बड़ा झटका था। हालांकि वे देश की खातिर शहीद हुए थे, पर सच्चाई तो यही थी कि अब अपने पिता के स्नेह से वह हमेशा के लिए वंचित हो गया था।

‘लेकिन यह न्यूज तो सीक्रेट होनी चाहिए थी। इतनी महत्वपूर्ण खबर भला लीक कैसे हो गयी?’ सहसा चमन के मन में प्रश्न कौंधा।

लेकिन अगले ही पल पुन: उस पर दु:ख हावी हो गया। उसने लाख कोशिश की कि वह स्वयं को संभाले, लेकिन आंसू बाहर तक छलक ही आए। और उसने उन्हें पोंछा भी नहीं। चुपचाप बह जाने दिया।

घर में मम्मी और छोटी बहन अभी सो रही थीं। जब उन्हें पता चलेगा, तो...? चमन एकदम से कांप उठा। मम्मी तो शायद स्वयं को संभाल भी न सकें। कैसे बर्दाश्त करेंगी वे इसे? ...और छोटी, वह तो जोर-जोर से चिल्लाने ही लगेगी। इसलिए चाहते हुए भी उसने किसी को नहीं जगाया। जितनी ही देर वे लोग यह द:ख भरा समाचार न सुनें, उतना ही...

चमन को अचानक ही वह दिन याद आ गया। लगभग एक महले पहले की बात है। पापा उस समय छुटि्टयों में घर आए हुए थे। उन छुटि्टयों के दौरान चमन को यह लगा कि पापा न तो उसे पर्याप्त समय देते हैं और न ही ठीक से बात करते हैं। जब देखो तब अपने कमरे में बैठे न जाने क्या करते रहते हैं।

एक दिन चमन से रहा नहीं गया। उसने सोचा कि पापा की जासूसी की जाए। आखिर ये अपने कमरे में क्या करते रहते हैं? उस दिन वह स्कूल से जल्दी आ गया था। मम्मी किसी काम से बाजार गयी हुयी थी।

स्कूल बैग रखने के बाद चमन सीधा पापा के कमरे के पास पहुंचा। देखा दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजे में नीचे की ओर दीमकों ने एक छोटा सा छेद कर दिया था। मम्मी ने कितनी बार नौकर से कहा था, लेकिन वह छेद अभी तक नहीं भरा गया था। चमन दरवाजे के पास पहुंचा और उससे आंख सटाकर अंदर का दृश्य देखने लगा।

कमरे में पापा एक कुर्सी पर बैठे हुए थे। उन्होंने अपने हाथ में एक चूहे को पकड़ रखा था। उसे देखकर वे धीरे-धीरे मुस्करा रहे थे। तभी उन्होंने एक कटोरी से सफेद पदार्थ लिया और उसे चूहे के शरीर पर लगाने लगे।

उस दृश्य को देख कर चमन को हंसी आ गयी। ये कौन सा इतना महत्वपूर्ण काम है, जिसके लिए पापा को मुझसे बात करने का समय नहीं मिलता? चमन को पापा के ऊपर थोड़ा सा गुस्सा भी आया। पर वह चुपचाप खड़ा-खड़ा पापा की गतिविधियां देखता रहा।

अगले ही पल एक चमत्कार हो गया। कर्नल अमन के हाथ में कैद चूहा एकदम से गायब हो गया। यह देखकर चमन हैरान रह गया। उसने देखा कि उसके पापा मुस्करा रहे हैं। यानी कि चूहा सचमुच में गायब हुआ है और पापा उसके बारे में जानते हैं।

और तभी एक गड़बड़ हो गयी। कमरे के अंदर का दृश्य देखने के लिए चमन को एक ओर झुकना पड़ रहा था। जिस कारण उसका दाहिना पैर एकदम से सुन्न हो गया। उसने अपने पैर को झटकने के लिए जैसे ही सीधे खड़े होने का प्रयत्न किया, उसका संतुलन बिगड़ गया। वह भड़ाम से जमीन पर गिर पड़ा।

आवाज सुनकर कर्नल अमन दरवाजा खोलकर बाहर आ गये। चमन को देखते ही वे सारी बात समझ गये। हालांकि चमन की इस हरकत से उन्हें गुस्सा तो बहुत आया, फिर भी उन्होंने अपने आप को संभाल लिया। बड़े संयत स्वरों में उन्होंने पूछा, ‘‘तुम यहां क्या कर रहे हो?’’

‘‘ज... ज... जी... जी, मैं... वो...’’ चमन एकदम से हकला गया।

‘‘तुमने कुछ देखा तो नहीं?’’ उन्होंने पूछा।

‘‘जी, ...वो चूहा...।’’ चमन ने कह तो दिया, लेकिन उसकी जान सूख गयी। अब तो जरूर उसे डांट पड़ेगी। इससे तो अच्छा था कि वह झूठ ही बोल देता, जिससे...

लेकिन आश्चर्य कि पिताजी ने उसे डांटा नहीं। उन्होंने प्यार से अमर का सिर सहलाया और उसे कमरे के अंदर ले गये।

कमरे में तमाम सामान इधर-उधर बिखरा हुआ था। चमन के साथ उसके पिता कर्नल अमन एक सोफे पर जा बैठे। वे उसे समझाते हुए बोले, ‘‘इस तरह दूसरों के कमरे में झांकना अच्छी बात नहीं।’’

पिता का प्यार पाकर चमन का हौसला बढ़ गया। वह बोला, ‘‘सॉरी पापा, आगे से ऐसी गल्ती नहीं होगी। ...लेकिन वह चूहा गायब कैसे हो गया था?’’

‘‘पहले वादा करो कि तुम ये बात किसी से कहोगे नहीं?’’

‘‘मैं वादा करता हूं पापा, किसी से नहीं कहूंगा।’’ चमन ने बडी मासूमियत से जवाब दिया।

‘‘तुम्हें मालूम होगा कि कोई चीज हमें क्यों दिखाई पडती है?’’ कर्नल अमन ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘जब किसी वस्तु पर पड़ने वाला प्रकाश उस वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आंखों तक पहुंचता है, तो वह वस्तु हमें नजर आती है। लेकिन यदि किसी वस्तु पर पड़ने वाला प्रकाश बिना विचलित हुए उसके पार निकल जाए, तो वह वस्तु अदृश्य हो जाएगी। अर्थात हमें नजर नहीं आएगी।’’

‘‘यानी कि वह गायब हो जाएगी?’’ चमन का मुंह आश्चर्य से खुल गया।

‘‘हां, और इसी तरह से गायब हुआ था वह चूहा।’’ कर्नल अमन ने बताया, ‘‘और चूहे को गायब करने में मददगार हुआ था वह पदार्थ, जो मैंने उसके शरीर पर लगाया था।’’

‘‘अरे वाह पापा, ये तो बड़ी मजेदार चीज बनाई है आपने। इसे तो मैं भी लगाकर गायब हो जाऊंगा और मम्मी के आगे ´हौ´ करके उन्हें डरा दूंगा।’’

‘‘नहीं बेटे, क्योंकि तुम अभी वादा कर चुके हो कि ये बात किसी को नहीं बताओगे।’’ कर्नल अमन ने उसे उसका वादा याद दिलाया, ‘‘और वैसे भी मैंने यह आविष्कार किसी खास उद्देश्य के लिए किया है।’’

‘‘खास उद्देश्य? यानी कि दुश्मनों को मजा चखाने के लिए?’’ चमन के चेहरे पर प्रसन्नता देखते ही बनती थी।

कर्नल अमन बोले, ‘‘हां, तुम बहुत समझदार हो। अच्छा, अब जाओ और अपना काम करो।’’

‘‘पर पापा, क्या मैं इसे एक बार लगा सकता हूं?`` चमन ने निवेदन किया, ``बस एक बार मैं गायब होना चाहता हूं। भगवान कसम पापा, मैं कहीं नहीं जाऊंगा। बस यहीं खड़ा रहूंगा।’’

‘‘नहीं बेटे, तुम ऐसी बात कभी सोचना भी मत।’’ कर्नल अमन की आवाज सख्त हो गयी।

‘‘लेकिन पापा, क्यों?’’

‘‘इसलिए कि यह पदार्थ बहुत जहरीला है। जो व्यक्ति इसे एक बार लगा लेगा, उसके शरीर की त्वचा जल जाएगी और सम्भव है कि...’’

‘‘ओह, तब तो यह बहुत खराब है पापा। आप इसे फेंक दीजिए।’’

‘‘नहीं बेटे, इससे मुझे एक लक्ष्य प्राप्त करना है। यह मेरी वर्षों की मेहनत का फल है। और इसी से मुझे मानवता के दुश्मनों को...।’’

चमन ने उनकी बात बीच में ही काट दी, ‘‘लेकिन पापा, इससे तो आपको...।’’

‘‘हम सिपाही हैं बेटे, वीर सिपाही। और सिपाही लोग मरने से नहीं डरते। वे तो होते ही हैं देश की खातिर हंसते-हंसते कुर्बान होने के लिए।’’

आहट सुनकर चमन की तन्द्रा टूटी। उसकी नजर पुन: अखबार में छपे पापा के फोटो पर पड़ी। वह मन ही मन बुदबुदाया, ‘‘सचमुच पापा, आप बहुत बहादुर है, जो देश की खातिर हंसते हुए कुर्बान हो गये। ...मुझे आप पर गर्व है पापा।’’

कहते-कहते चमन का चेहरा गर्व से तन गया। उसके गालों पर बने आसुओं के निशान चेहरे की लालिमा में डूब गये। जब उसके पिताजी देश के लिए हंसते हुए शहीद हो सकते हैं, तो क्या वह अपने पापा की जुदाई के गम को भी नहीं बर्दाश्त कर सकता? उसने अपनी मुटि्ठयों को भींचा और बड़े गर्व से मम्मी को जगाने के लिए चल पड़ा।

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