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कैसे सुधरे दलित बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति ?

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दलित बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति और उसमें सुधार के उपाय।

सामान्य जनसंख्या के सापेक्ष दलित बालिकाओं का ड्राप आउट अंतर बहुत ज्यादा है। उच्च शिक्षा में भी दलित वर्ग की बालिकाओं अनुपात सामान्य वर्ग की बालिकाओं की तुलना में बहुत पीछे है। इस स्थिति में सुधार कैसे आ सकता है, बता रहे हैं चर्चित श‍िक्षाविद एवं लेखक सुशील कुमार शर्मा।
 
दलित बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति

-सुशील कुमार शर्मा

दलित बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति देश की सामाजिक बनावट व आर्थिक श्रेणीबद्धता 'सभी के लिए एक जैसी शिक्षा' के सिद्धांत के सामने हमेशा यक्ष प्रश्न रही है और शिक्षा हमेशा स्तरीय खांचो में बंटी रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शिक्षा के मामले में दलित बालिकाओं की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं आया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बालिकाएं शिक्षा के मामले में अपने वर्ग के बालकों एवं सामान्य वर्ग की बालिकाओं से बहुत पीछे हैं। शिक्षा में इस बात का महत्व है कि बालिकाओं का कितना अनुपात पढाई पूरी किये बगैर स्कूल छोड़ कर घर बैठ जाती हैं। शिक्षा के सभी स्तरों पर दलित बालिकाओं की ड्राप आउट दर सामान्य जनसँख्या के अनुपात में बहुत ज्यादा है।
Girls Students
दलित बालिकाओं की ड्रॉप आउट दरें
संवर्ग        सामान्य        SC          ST
कक्षा 1-5     28.57%      34.20%      42.00%
कक्षा 1-8     52.92%      57.30%      67.10%
कक्षा 1-10    64.82%      71.30%      77.80%

सामान्य जनसंख्या के सापेक्ष दलित बालिकाओं का ड्राप आउट अंतर बहुत ज्यादा है। उच्च शिक्षा में भी दलित वर्ग की बालिकाओं अनुपात सामान्य वर्ग की बालिकाओं की तुलना में बहुत पीछे है। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 13.8% है, जबकि अनुसूचित जाति की बालिकाओं की दर 1.8% एवं अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं की दर 1.6% मात्र है। 

6 से 14 आयु वर्ग के 35.1 लाख आदिवासी बच्चों में 54 प्रतिशत अभी भी स्कूलों से बाहर हैं। इस आयु वर्ग में 18.9 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा रही हैं। आदिवासी एवं दलित समुदाय में बालिका शिक्षा की स्थिति काफी बुरी है। आदिवासी समुदाय की कुल 41.4 प्रतिशत लड़कियाँ शिक्षित हैं। सहरिया और बैगा समुदाय में यह स्थिति और भी बुरी है। मात्र 15.9 प्रतिशत सहरिया लड़कियों का प्रतिशत ज्यादा है। 45.36 प्रतिशत स्कूल के बाहर लड़कों की तुलना में 54.64 लड़कियां स्कूल से बाहर थी और कुल 10 प्रतिशत स्कूल से बाहर पाए गए। 

स्कूलों से बाहर निकलते बच्चों की संख्या स्कूलों में दर्ज न होने वाले बच्चों से ज्यादा थी। इससे यह पता चल रहा था कि बच्चों के नाम स्कूलों में दर्ज तो हो जा रहे थे पर वे काफी जल्दी बाहर हो जा रहे थे। स्कूलों से बाहर हो रहे बच्चों में भी लड़कियों की संख्या 60 प्रतिशत है वहीं लड़कों की दर 47.31 प्रतिशत है। 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग में शाला में दर्ज न होने वाले 186 बच्चों में 98 लड़कियां हैं।

प्राथमिक स्तर पर प्रवेश लेने वाली बालिकाओं में से 24.82 प्रतिशत कक्षा 5 तक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं और उन्हें विद्यालय छोड़ना पड़ता है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 50.76 प्रतिशत बालिकाओं को बीच में ही विद्यालय छोड़ कर घरेलू कार्यों में संलग्न होना पड़ता है।

दलित बालिकाओं की शिक्षा छोड़ने के कारण:
1. दलित बालिकाओं को बीच में ही विद्यालय छोड़ कर घरेलू कार्यों में संलग्न होना पड़ता है। 

2. स्कूल का दूर होना, यातायात की अनुपलब्धता, घरेलू काम, छोटे भाई-बहनों की देखरेख, आर्थिक व विभिन्न सामाजिक समस्यायें आदि कुछ ऐसे कारण हैं जो कि बालिका शिक्षा की राह में बाधा है। 

3. शौचालय की कमी, कमरे की कमी, टीएलएम की कमी, कौशल से युक्त शिक्षक की कमी, पानी की कमी - के बावजूद दलित बालिकाएं शाला जाना चाहती हैं हैं और पढ़ना चाहती हैं, पर शाला का नीरस वातावरण और शिक्षकों की उपेक्षा बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह को कम कर देती है, जिसकी वजह से दलित बालिकाओं के लिए शाला जाना सजा से कम नहीं लगता। 

4. स्कूलों के अंदर छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयाँ दूर हो सकें और सभी परिवार बिना किसी भय व संकोच के अपने घर की लड़कियों को स्कूल भेज सकें। 

5. आदिवासी इलाकों में चल रहे स्कूलों में अधोसंरचना एवं संसाधनों की कमी है। अधिकतर विद्यालययों में मात्र एक पूर्णकालिक योग्य शिक्षक है। अन्य सुविधायें जैसे पृथक शौचालय, चार दीवारी, कक्षा भवन आदि की कमी है। ये तो अधोसंरचनात्मक कमियां हैं लेकिन हम उन कमियों का क्या करें जो आदिवासी शिक्षा के लिए राज्य के खर्चे में आ गई है। 

6. इन स्कूलों में जिन शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है वे दलित बालिकाओं के साथ दोहरा व्यवहार करते हैं। वे इन बालिकाओं से स्कूल की सफाई आदि का काम कराते हैं। 

7. चूंकि आदिवासी समुदाय दूर-दराज इलाकों में रहता है, इस वजह से समुदाय की स्कूलों तक पहुंच भी एक बड़ी समस्या है और एक बड़ा तबका स्कूलों से दूर है। 

8. विडंबना यह है कि देश की तीन चौथाई आबादी के लिए बने सरकारी स्कुलो की दुर्दशा 'शिक्षा के लोकव्यापीकरण' के अंतरराष्ट्रीय नारे के नाम पर जारी है|स्कूल के अंदर भी आदिवासी बच्चों के साथ स्कूल के मास्टर एवं समाज के अगड़ी जाति के बच्चों का व्यवहार समानता का नहीं होता है। उन्हें कक्षा में सबसे पीछे बिठाया जाता है। उनसे छुआछूत किया जाता है। स्कूल में साफ-सफाई का काम भी इन्हीं से कराया जाता है। तो अगर कोई परिवार अपने बच्चे को स्कूल भेजता भी है तो उसके ठहराव की संभावना काफी कम हो जाती है। 

9. ग्रामीण क्षेत्रों में दलित बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं का आभाव है। दलित बालिकाओं के परिवारों के पास पूंजी एवं परिसम्पत्तियों के अभाव के चलते दलित बालिकाएं बालश्रम करने को मजबूर हैं। शैक्षिक विकास के लिए सर्वाधिक उपयुक्त बाल्य अवस्था एवं किशोर वय श्रम के बोझ के नीचे दब कर रह जाती है। 

10. पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली निर्धनता उनकी शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए सबसे बड़ा अवरोध है।

संवैधानिक प्रावधान:
संविधान के अनुच्छेद 46 के अनुसार- “राज्य विशेष सावधानी के साथ समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजातियों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों के उन्नयन को बढ़ावा देगा और सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के सामाजिक शोषण से उनकी रक्षा करेगा”। अनुच्छेद 330, 332, 335, 338 से 342 तथा संविधान के पांचवीं और छठवीं अनुसूची अनुच्छेद 46 में दिए गए लक्ष्य हेतु विशेष प्रावधानों के संबंध में कार्य करते हैं। समाज के कमजोर वर्ग के लाभार्थ इन प्रावधानों का पूर्ण उपयोग किए जाने की आवश्यकता है।

स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के व्यक्तियों के शैक्षणिक आधार को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 एवं कार्ययोजना (पी.ओ.ए.) 1992 के अनुपालन में अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए प्राथमिक शिक्षा, साक्षरता एवं माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग की वर्तमान योजनाओं में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

संकल्प: 
1. 2006 में शिक्षा के अधिकार अधिनियम में श्री वर्नर मुनोज ने सुझाव दिया की दलित बालिकाओं के स्कूल में नामांकन एवं स्थिर रहवास के लिए सभी बाधाओं को हटाने का संकल्प होना चाहिए। 

2. ISDN ने भी सरकार को सुझाव दिया है की UN ड्राफ्ट की नियमानुसार दलित समूहों की बालिकाओं की शिक्षा में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। 

3. UN फोरम आफ मायनरटीज इश्यूज की बैठक 2008 में बांग्लादेश में हुई थी जिसमें दलित एवं अल्पसंख्यक बालिकाओं की शिक्षा से पलायन एवं उनके शोषण के कारणों पर विस्तृत चर्चा कर संकल्प पारित किया गया।

दलित बालिकाओं की शिक्षा में सहभागिता के लिए सुझाव:
1. शिक्षा का सिद्धांत एक बुद्धिवादी दृष्टिकोण पर आश्रित है कि सभी मनुष्यों मुक्त एवं समान अधिकार के साथ पैदा हुए हैं। और उस जाति व्यवस्था को आदमी ने अपने ही की सुविधा के लिए बनाया है। एक सामाजिक आदर्श के रूप में अस्पृश्यता को पूरी तरह से खत्म किया जाना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में दलित बच्चों के साथ में अन्य बच्चों के समान व्यवहार किया जाना चाहिए। 

2. पर प्रगतिशील निवेशअपवर्जित बच्चों, कमजोरस्कूलों और तहत प्रदर्शनक्षेत्रों समावेशी और न्यायसंगत शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक दृष्टिकोण 

3. दलित बालिकाओं पर केंद्रित शैक्षिक दृष्टिकोण 

4. अच्छी तरह से कार्यकरने वाली एवं अच्छी तरह से प्रबंधित और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली। 

5. स्कूली शिक्षा के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं को कम करने के प्रयासों में तेजी लाने की आश्यकता है। 

6. दलित बालिकाओं की शिक्षा शोषण मुक्त हो एवं उनके अधिकारों एवं लाभों का वे अधिकतम उपयोग कर सकें इसके लिए जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन होना चाहिए। लिंग संवेदीकरण (Gender sensitization) कार्यक्रम तैयार होने चाहिए। 

7. शिक्षा बालिका सशक्तिकरण का एक प्रमुख हथियार है। दलित बालिकाओं केलिए रोजगारोन्मुख शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें विविध व्यावसायिक प्रशिक्षण जिनमे कुटीर उद्योग ,गांव शिल्प आदि प्रशिक्षण उन्हें उनके घर पर मिलना चाहिए। 

8. प्रतिभाशाली दलित बालिकाओं की खोज का कोई वैज्ञानिक तरीका होना चाहिए एवं गांव स्तर पर उन्हें सुविधाएँ मिलनी चाहिए। 

9. दलित बालिकाओं में प्रतिस्पर्धा की भावनायें जाग्रत की जानी चाहिए। 

10. दलित बालिकाओं को परिणाम मूलक शिक्षा दी जानी चाहिए। 

11. उच्च शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी शासन को लेनी चाहिए। 

12. विद्यालय स्तर पर शिक्षकों को इस बात केलिए प्रोत्साहित एवं प्रशिक्षित करना चाहिए की वो दलित एवं गैर दलित में कोई फर्क न करें इसके लिए नियमित अन्तराल में काउंसलिंग की आवश्यकता है। 

13. विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा में दलित बालिकाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए तहसील या गांव स्तर पर स्पेशल कोचिंग एवं आर्थिक सहायता दलित बालिकाओं को मिलना चाहिए। दलितों को शिक्षित करने की दिशा में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी हम सभी को स्वीकार करना चाहिए। 

भारत में दलित बालिकाओं के लिए शिक्षा सुनिश्चित करना जहाँ जाति व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था एवं सामाजिक श्रेष्ठताओं का बोल बाला हो एक बहुत बड़ी चुनौती है। दलित बालिकाओं का स्कूलों में नामांकन करवाना ही हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए बल्कि उनकी पढाई को पूरा करवाने के लिए भी कोई उपाय हमारे पास होना चाहिए। अपरिवर्तित सामाजिक मूल्यों के चलते शिक्षा से दलित बालिकाओं का जुडाव नगण्य जैसा है। 

दलित बालिकाओं में आत्मविश्वास, अपने अधिकारों के बारे में जागरूकता एवं अन्याय से लड़ने की शक्ति शिक्षा से प्राप्त होती है। दलित बालिकाओं से शिक्षा में असमानता का व्यवहार, सामाजिक अश्यपृश्यता, मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना समाज, परिवार एवं तन्त्र द्वारा किया जाना सर्व विदित है। सबसे बड़ी विडंबना ये है की ये सारी घटनाएँ जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं जिम्मेदार लोगों के संज्ञान में होती हैं। आज आवश्यकता है की समाज, तंत्र और जनप्रतिनिधि इन दलित सपनों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हों।
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लेखक परिचय:  सुशील कुमार शर्मा व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं। अापकी रचनाएं समय-समय पर 'साइंटिफिक वर्ल्ड' सहित विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित होती रही हैं। आपसे सम्पर्क करने का पता है- सुशील कुमार शर्मा (वरिष्ठ अध्यापक), कोचर कॉलोनी, तपोवन स्कूल के पास, गाडरवारा, जिला-नरसिंहपुर, पिन-487551 (MP)  keywords: Education Of Scheduled Castes & Scheduled Tribes in Hindi, Educational Development Programme for Scheduled Castes & Scheduled Tribes in Hindi, Empowerment Of Scheduled Caste Women/Girls in Hindi, sc and st girls education in hindi, sc st education schemes in hindi, sc st education loan in hindi, reservation for sc st in education in hindi, free education for sc st students in hindi, sc st higher education scholarship in hindi, sc girls state in hindi, indian girls education in hindi, importance of girls education essay in hindi, advantages of female education in hindi, speech on girls education in hindi, female education paragraph in hindi, women's education rights in hindi, beti bachao beti padhao in hindi, girls school dropout in hindi, causes of school dropout in hindi, school dropout definition in hindi, effects of school dropout in hindi, school dropout prevention in hindi, high school dropout facts in hindi, school dropout rates in hindi, high school dropout reasons in hindi,

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