इससे तो अच्छा : जाकिर अली रजनीश की विज्ञान कथा
“करम बेटे, कहां जा रहे हो? चलो पहले होमवर्क करो।”
मम्मी की आवाज सुनकर करम का मूड ऑफ हो गया। कहां वह बैट–बॉल लेकर खेलने जा रहा था और कहां यह होमवर्क। मन ही मन उसे होमवर्क पर बहुत गुस्सा आया। पर मम्मी का हुक्म तो मानना ही था। बैट–बॉल को उसने एक ओर पटका और बस्ता लेकर पढने बैठ गया। उसने गणित की किताब से सवाल को कॉपी पर उतारा और उसे समझने की कोशिश करने लगा।
लेकिन करम का सारा ध्यान तो खेल में रखा था, इसलिए उसे सवाल समझ में नहीं आया। वह सोचने लगा– काश कोई ऐसी मशीन होती, जो सारा होमवर्क कर देती...
देखते ही देखते करम कल्पना लोक में खो गया और जल्द ही उसे नींद ने आ घेरा।
अभी कुछ ही दिन पहले करम ने किसी बाल पत्रिका में पढा था– ‘वैज्ञानिकों को ऐसे रोबोट बनाने में सफलता मिली है, जो मनुष्य की तरह सभी काम करते हैं।’ वह समाचार याद आते ही करम के दिमाग में एक विचार कौंधा– ‘क्यों न एक ऐसा रोबोट बनाया जाए, जो उसका होमवर्क भी कर दे।’
यह सोचकर करम रोमांचित हो उठा। अपनी सोच को अमली जामा पहनाने के लिए उसने लाइब्रेरी की शरण ली। वहां पर उसने रोबोट से सम्बंधित ढ़ेर सारी किताबें पढ़ीं। उन किताबों को पढ़ने के बाद उसे विश्वास हो गया कि वह भी एक रोबोट बना सकता है। फिर क्या था उसने रोबोट बनाने के लिए सामान जुटाना शुरू कर किया।
सबसे पहले करम ने अपना गुल्लक निकाला। गुल्लक में ज्यादा पैसे नहीं थे। उतने रूपयों से रोबोट बनाने का आधा सामान भी नहीं मिला। अब वह क्या करे? और पैसे कहां से लाए? उसने सोचा कि वह अपने पापा से बात करे। लेकिन कहीं वे उसे उल्टा डांटने ही लगे तो?
दूसरा रास्ता यह था कि वह मम्मी से बात करे। उसे यह तरीका सही लगा। उसने मम्मी का मूड देखकर अपने मन की बात कही, “अम्मीजान, मैं एक रोबोट बनाना चाहता हूं।”
“अरे वाह, ये तो बहुत अच्छी बात है।” मम्मी ने रोमांचित होकर पूछा, “क्या तुम ऐसा कर पाओगे?”
“हां अम्मी, बस कुछ रूपयों की जरूरत है।” करम ने पूरे विश्वास के साथ कहा, “रोबोट का सामान लाना है। लेकिन जब तक रोबोट बन न जाए, आप ये बात किसी और को नहीं बताइएगा।”
“ठीक है, लेकिन इससे तुम्हारी पढ़ाई नहीं डिस्टर्ब होनी चाहिए।”
“जी अम्मी।” करम ने वादा किया।
अम्मी को करम के ऊपर पूरा यकीन था। उन्होंने उसे जरूरत के मुताबिक रूपये दे दिये। करम ने अम्मी का शुक्रिया अदा किया और अपने काम में लग गया।
करम ने किताब में बताई गयी विधि के अनुसार कल–पुर्जों को क्रम में जोड़ना शुरू कर दिया। इस काम में उसे काफी मेहनत करनी पड़ी। जहां कहीं पर वह अटक जाता, किताब की शरण में पहुंच जाता। किताब पढ़ने के बाद उसकी सारी समस्या हल हो जाती। वह फिर से अपने काम में जुट जाता।
रोबोट के निर्माण में करम ने दिन–रात एक कर दिया। न उसने दिन को दिन समझा और न ही रात को रात। पढ़ाई के अलावा उसके पास जितना समय बचता था, वह रोबोट के बनाने में लगा देता।
आखिर दो महीने बाद करम की मेहनत रंग लाई। जी–तोड़ मेहनत के बाद उसका रोबोट तैयार हो गया। देखने में वह बिलकुल मशीनी मानव लगता था।
अपनी इस सफलता पर करम फूला नहीं समाया। उसने अपने ही नाम पर रोबोट का नाम ‘राजू’ रखा। जब उसने मम्मी–पापा को अपना रोबोट दिखाया, तो वे बहुत खुश हुए। उन्होंने करम की इस उपलब्धि पर उसे ढ़ेर सारी बधाइयां दीं। दोस्तों ने तो रोबोट को देखकर दांतों तले उंगली ही दबा ली। मास्टर जी ने भी उसकी जी–भर कर प्रशंसा की। सभी लोगों से अपनी तारीफ सुनकर करम फूला नहीं समाया।
अब रोबोट के टेस्ट की बारी थी। आखिरकार वह समय भी आ गया। करम ने रोबोट को आदेश दिया, “जाओ राजू, मेरा होमवर्क हल करो।”
अपने मालिक का हुक्म सुनने के बाद भी रोबोट शान्त रहा। यह देखकर करम का पारा चढ़ गया। उसने रोबोट को दुबारा आदेश दिया, “राजू, तुमने सुना नहीं? मेरा होमवर्क करो।”
पर रोबोट इस बार भी कुछ नहीं बोला। उसके पेट पर लगी स्क्रीन पर कोई संदेश लिख कर आ रहा था। करम ने उस संदेश पर ध्यान नहीं दिया। अपने आदेश की अवहेलना देखकर उसका शरीर क्रोध के कारण कांपने लगा। उसने गुस्से में एक झापड़ रोबोट के गाल पर रसीद कर दिया।
रोबोट लोहे का बना हुआ था। रोबोट के चोट लगने के बजाए करम का हाथ ही झन्ना गया। वह अपना हाथ पकड़ कर रह गया और रोबोट को बुरा–भला कहने लगा। तभी करम के मास्टर जी वहां आ गये। वे बोले, “ये क्या कर रहे हो करम? तुम अपना गुस्सा रोबोट पर क्यों उतार रहे हो?”
“मास्टर जी, ये रोबोट मेरा कहना ही नहीं मानता।” करम ने अपनी झेंप मिटाने के लिए रोबोट पर इल्जाम मढ़ा।
“इसमें इसकी क्या गलती?” मास्टरजी ने रोबोट का पक्ष लिया।
“गलती क्यों नहीं है मास्टर जी?” करम ने सवाल किया, “मैंने आखिर इसे होमवर्क करने के लिए ही तो बनाया है?”
“हां, पर तुमने सिर्फ एक लोहे का ढ़ांचा बनाया है। अगर तुम चाहते हो कि यह रोबोट सवाल भी करे, तो तुम्हें इसके मस्तिष्क में प्रोग्राम करके गणित के सूत्र भी डालने होंगे। और यह बहुत मुश्किल काम है।”
“मुश्किल काम है?” मास्टर जी की बात सुनकर करम हताश हो गया। उसने बुझे मन से पूछा, “इसमें कितना समय लग सकता है?”
“इसमें दो–तीन साल भी लग सकता है। इसके लिए तुम्हें बहुत सारी किताबें पढ़नी होंगी, प्रोग्रामिंग सीखनी होगी, सवालों के सूत्रों को कोड में बदलना होगा, फिर उन्हें रोबोट के मस्तिष्क में...”
“रहने दीजिए मास्टर जी,” करम ने मास्टर जी की बात बीच में ही काट दी, “इससे तो अच्छा है कि मैं अपने सवाल खुद ही लगा लूं।”
और तभी करम की नींद टूट गयी। ये क्या? क्या वह सपना देख रहा था? हां, वह तो मेज पर बैठा–बैठा सो रहा था। मम्मी के पैरों की आहट सुनकर उसकी नींद टूटी थी। कुछ ही पलों में मम्मी पास आ गयीं। वे बोलीं, “क्या सोच रहे हो बेटा?”
“ज...जी कुछ नहीं।” करम चौंकते हुए बोला और फिर सवाल लगाने में व्यस्त हो गया। ताकि उसके बाद वह आराम से खेलने के लिए जा सके।
मम्मी की आवाज सुनकर करम का मूड ऑफ हो गया। कहां वह बैट–बॉल लेकर खेलने जा रहा था और कहां यह होमवर्क। मन ही मन उसे होमवर्क पर बहुत गुस्सा आया। पर मम्मी का हुक्म तो मानना ही था। बैट–बॉल को उसने एक ओर पटका और बस्ता लेकर पढने बैठ गया। उसने गणित की किताब से सवाल को कॉपी पर उतारा और उसे समझने की कोशिश करने लगा।
लेकिन करम का सारा ध्यान तो खेल में रखा था, इसलिए उसे सवाल समझ में नहीं आया। वह सोचने लगा– काश कोई ऐसी मशीन होती, जो सारा होमवर्क कर देती...
देखते ही देखते करम कल्पना लोक में खो गया और जल्द ही उसे नींद ने आ घेरा।
अभी कुछ ही दिन पहले करम ने किसी बाल पत्रिका में पढा था– ‘वैज्ञानिकों को ऐसे रोबोट बनाने में सफलता मिली है, जो मनुष्य की तरह सभी काम करते हैं।’ वह समाचार याद आते ही करम के दिमाग में एक विचार कौंधा– ‘क्यों न एक ऐसा रोबोट बनाया जाए, जो उसका होमवर्क भी कर दे।’
यह सोचकर करम रोमांचित हो उठा। अपनी सोच को अमली जामा पहनाने के लिए उसने लाइब्रेरी की शरण ली। वहां पर उसने रोबोट से सम्बंधित ढ़ेर सारी किताबें पढ़ीं। उन किताबों को पढ़ने के बाद उसे विश्वास हो गया कि वह भी एक रोबोट बना सकता है। फिर क्या था उसने रोबोट बनाने के लिए सामान जुटाना शुरू कर किया।
सबसे पहले करम ने अपना गुल्लक निकाला। गुल्लक में ज्यादा पैसे नहीं थे। उतने रूपयों से रोबोट बनाने का आधा सामान भी नहीं मिला। अब वह क्या करे? और पैसे कहां से लाए? उसने सोचा कि वह अपने पापा से बात करे। लेकिन कहीं वे उसे उल्टा डांटने ही लगे तो?
दूसरा रास्ता यह था कि वह मम्मी से बात करे। उसे यह तरीका सही लगा। उसने मम्मी का मूड देखकर अपने मन की बात कही, “अम्मीजान, मैं एक रोबोट बनाना चाहता हूं।”
“अरे वाह, ये तो बहुत अच्छी बात है।” मम्मी ने रोमांचित होकर पूछा, “क्या तुम ऐसा कर पाओगे?”
“हां अम्मी, बस कुछ रूपयों की जरूरत है।” करम ने पूरे विश्वास के साथ कहा, “रोबोट का सामान लाना है। लेकिन जब तक रोबोट बन न जाए, आप ये बात किसी और को नहीं बताइएगा।”
“ठीक है, लेकिन इससे तुम्हारी पढ़ाई नहीं डिस्टर्ब होनी चाहिए।”
“जी अम्मी।” करम ने वादा किया।
अम्मी को करम के ऊपर पूरा यकीन था। उन्होंने उसे जरूरत के मुताबिक रूपये दे दिये। करम ने अम्मी का शुक्रिया अदा किया और अपने काम में लग गया।
करम ने किताब में बताई गयी विधि के अनुसार कल–पुर्जों को क्रम में जोड़ना शुरू कर दिया। इस काम में उसे काफी मेहनत करनी पड़ी। जहां कहीं पर वह अटक जाता, किताब की शरण में पहुंच जाता। किताब पढ़ने के बाद उसकी सारी समस्या हल हो जाती। वह फिर से अपने काम में जुट जाता।
रोबोट के निर्माण में करम ने दिन–रात एक कर दिया। न उसने दिन को दिन समझा और न ही रात को रात। पढ़ाई के अलावा उसके पास जितना समय बचता था, वह रोबोट के बनाने में लगा देता।
आखिर दो महीने बाद करम की मेहनत रंग लाई। जी–तोड़ मेहनत के बाद उसका रोबोट तैयार हो गया। देखने में वह बिलकुल मशीनी मानव लगता था।
अपनी इस सफलता पर करम फूला नहीं समाया। उसने अपने ही नाम पर रोबोट का नाम ‘राजू’ रखा। जब उसने मम्मी–पापा को अपना रोबोट दिखाया, तो वे बहुत खुश हुए। उन्होंने करम की इस उपलब्धि पर उसे ढ़ेर सारी बधाइयां दीं। दोस्तों ने तो रोबोट को देखकर दांतों तले उंगली ही दबा ली। मास्टर जी ने भी उसकी जी–भर कर प्रशंसा की। सभी लोगों से अपनी तारीफ सुनकर करम फूला नहीं समाया।
अब रोबोट के टेस्ट की बारी थी। आखिरकार वह समय भी आ गया। करम ने रोबोट को आदेश दिया, “जाओ राजू, मेरा होमवर्क हल करो।”
अपने मालिक का हुक्म सुनने के बाद भी रोबोट शान्त रहा। यह देखकर करम का पारा चढ़ गया। उसने रोबोट को दुबारा आदेश दिया, “राजू, तुमने सुना नहीं? मेरा होमवर्क करो।”
पर रोबोट इस बार भी कुछ नहीं बोला। उसके पेट पर लगी स्क्रीन पर कोई संदेश लिख कर आ रहा था। करम ने उस संदेश पर ध्यान नहीं दिया। अपने आदेश की अवहेलना देखकर उसका शरीर क्रोध के कारण कांपने लगा। उसने गुस्से में एक झापड़ रोबोट के गाल पर रसीद कर दिया।
रोबोट लोहे का बना हुआ था। रोबोट के चोट लगने के बजाए करम का हाथ ही झन्ना गया। वह अपना हाथ पकड़ कर रह गया और रोबोट को बुरा–भला कहने लगा। तभी करम के मास्टर जी वहां आ गये। वे बोले, “ये क्या कर रहे हो करम? तुम अपना गुस्सा रोबोट पर क्यों उतार रहे हो?”
“मास्टर जी, ये रोबोट मेरा कहना ही नहीं मानता।” करम ने अपनी झेंप मिटाने के लिए रोबोट पर इल्जाम मढ़ा।
“इसमें इसकी क्या गलती?” मास्टरजी ने रोबोट का पक्ष लिया।
“गलती क्यों नहीं है मास्टर जी?” करम ने सवाल किया, “मैंने आखिर इसे होमवर्क करने के लिए ही तो बनाया है?”
“हां, पर तुमने सिर्फ एक लोहे का ढ़ांचा बनाया है। अगर तुम चाहते हो कि यह रोबोट सवाल भी करे, तो तुम्हें इसके मस्तिष्क में प्रोग्राम करके गणित के सूत्र भी डालने होंगे। और यह बहुत मुश्किल काम है।”
“मुश्किल काम है?” मास्टर जी की बात सुनकर करम हताश हो गया। उसने बुझे मन से पूछा, “इसमें कितना समय लग सकता है?”
“इसमें दो–तीन साल भी लग सकता है। इसके लिए तुम्हें बहुत सारी किताबें पढ़नी होंगी, प्रोग्रामिंग सीखनी होगी, सवालों के सूत्रों को कोड में बदलना होगा, फिर उन्हें रोबोट के मस्तिष्क में...”
“रहने दीजिए मास्टर जी,” करम ने मास्टर जी की बात बीच में ही काट दी, “इससे तो अच्छा है कि मैं अपने सवाल खुद ही लगा लूं।”
और तभी करम की नींद टूट गयी। ये क्या? क्या वह सपना देख रहा था? हां, वह तो मेज पर बैठा–बैठा सो रहा था। मम्मी के पैरों की आहट सुनकर उसकी नींद टूटी थी। कुछ ही पलों में मम्मी पास आ गयीं। वे बोलीं, “क्या सोच रहे हो बेटा?”
“ज...जी कुछ नहीं।” करम चौंकते हुए बोला और फिर सवाल लगाने में व्यस्त हो गया। ताकि उसके बाद वह आराम से खेलने के लिए जा सके।

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