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ब्‍लॉगवाणी: रूमानी जज्‍बों और तकनीक का सुंदर सामंजस्‍य!

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(जनसंदेश टाइम्‍स, 02 नवम्‍बर, 2011 के 'ब्‍लॉगवाणी' कॉलम में प्रकाशित) शायद आपको याद ह...


(जनसंदेश टाइम्‍स, 02 नवम्‍बर, 2011 के 'ब्‍लॉगवाणी' कॉलम में प्रकाशित)
शायद आपको याद होगा कि जब पहली बार देश में कम्‍प्‍यूटर का आगमन हुआ था, तो उसके खिलाफ कैसा माहौल था। कम्‍प्‍यूटर विरोधी लगातार कह रहे थे कि उसके आने के बाद देश का बाबूवर्ग बेरोजगार हो जाएगा और हिन्‍दी भाषा के सामने एक अभूतपूर्व संकट पैदा हो जाएगा। एक ओर जहाँ कुछ लोग इस हव्‍वे को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे थे, वहीं कुछ ऐसे दूरदर्शी लोग भी थे, जो उसकी महत्‍ता को समझते हुए उसकी पुरजोर वकालत भी कर रहे थे। और जैसा कि सारा विश्‍व जानता है कि तकनीक का पहिया सिर्फ आगे की ओर ही चलता है। यही कारण है कि कम्‍प्‍यूटर आया और पूरे देश पर छा गया। लेकिन ध्‍यान देने वाली बात यह है कि कम्‍प्‍यूटर को लेकर जैसा हव्‍वा हमारे देश में खड़ा किया गया था, वैसा माहौल शायद ही किसी और देश में बना हो। इस विरोधी माहौल का प्रमुख कारण था हमारे समाज का परम्‍परावादी और बहुत हद तक रूढि़वादी ढ़ाँचा, जहाँ नई तकनीक, नई सोच को पैर जमाने में समय लगता ही है।

सिंधु घाटी की सभ्‍यता से लेकर आज तक गर्व के साथ खड़ा हमारा यह देश सिर्फ अपनी परम्‍पराओं और रूढि़यों के लिए ही नहीं पहचाना जाता है, यह देश सिलीकॉन वैली की धारा को मोड़ने और उसपर काबिज होने के लिए भी जाना जाता है। और यह श्रेय जाता है इस देश के ऊर्जावान युवाओं को। भारत की माटी में जन्‍मे युवाओं ने जिस गति से कम्‍प्‍यूटर तकनीक को अपनाकर उसमें सफलता के झण्‍डे गाड़े हैं, उसे देख कर सारा विश्‍व चकित है। युवाओं का यह अविश्‍वसनीय प्रदर्शन सिर्फ नई कम्‍प्‍यूटर तकनीकों के विकास में ही नहीं दिखता, उसको जन सुलभ बनाने और उसके व्‍यवहार के तरीकों को आम आदमी तक पहुँचाने की दिशा में भी देखा जा सकता है। युवाओं के इस उत्‍साह ने न सिर्फ आम जन के मन से कम्‍प्‍यूटर तकनीक के हव्‍वे को निकालने में मदद की है, वरन इन्‍टरनेट पर हिन्‍दी के प्रसार की भी विशाल पूर्वपीठिका तैयार की है। ऐसी ही लोकहितकारी सोच रखने वाले एक हिन्‍दी समर्थक ब्‍लॉगर हैं श्री विनय प्रजापति नजर

उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पैदा हुए विनय साधारण जीवनशैली वाले सरल व्यक्ति हैं। वे कम्‍प्‍यूटर प्रोग्रामिंग के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग के महारथी हैं और साथ ही साथ हैकिंग के लिए कुख्‍यात रिवर्स कोड इंजीनियरिंग के खिलाड़ी भी हैं। उनके इस ज्ञान की थाह उनके तकनीकी ब्‍लॉग तकनीक दृष्टा (http://techprevue.blogspot.com) पर ली जा सकती है। विनय जानकारी को खुले हाथ से बाँटने के हिमायती हैं। इसलिए वे अपने ब्‍लॉग पर ऐसा गूढ़ ज्ञान भी बाँटते हुए नजर आते हैं, जिन्‍हें आमतौर से कम्‍प्‍यूटर विशेषज्ञ अपने तक ही सीमित रखना चाहते हैं। कम्‍यूनिकेशन में महारत रखने के कारण ब्‍लॉग ब्‍लॉग जगत की कठिन युक्तियों और कम्‍प्‍यूटर तकनीक को इतनी सहजता से बताते हैं कि पाठक के लिए उन्‍हें समझना बेहद आसान हो जाता है।

विनय सिर्फ अपने तकनीकी कौशल के लिए ही ब्‍लॉग जगत में नहीं जाने जाते हैं। वे एक शायराना मिजाज वाले युवा हैं और दोस्‍तों के बीच गुलजार, आनंद बक्षी तथा इरशाद कामिल के गहरे प्रशंसक के रूप में भी जाने जाते हैं। वे अपनी इस चाहत का श्रेय पुराने लखनऊ की अपनी परवरिश को देते हैं। यही कारण है कि वे अपनी नसों में उर्दू का नशा-सा महसूस करते हैं और शायरी के द्वारा अपने जज्‍बों को बयाँ करने में बेइन्‍तेहा खुशी महसूस करते हैं। उनकी शायरी में प्यार, दु:ख, विरह, दर्द, मौसम और तनहाई आदि विषय बार-बार आते हैं। यही कारण है कि उनके ये भाव किशोरों और युवाओं को खूब भाते हैं। 

अपनी शायरी के अलग-अलग मूड को ध्‍यान में रखते हुए उन्‍होंने तीन अलग-अलग ब्‍लॉग बनाए हैं, जो गुलाबी कोंपलें (http://pinkbuds.blogspot.com), चाँद, बादल और शाम (http://prajapativinay.blogspot.com) तथा तख़लीक़-ए-नज़र (http://vinayprajapati.wordpress.com) के नाम से जाने जाते हैं। बहर और वज्‍न से बेखबर विनय की रचनाएँ अपनी मौलिकता तथा नये अंदाज के कारण ब्‍लॉग जगत में काफी लोकप्रिय हैं। शायद यही कारण है कि अब तक उनकी पचास से अधिक नज्‍में इंटरनेट चोरों का शिकार हो चुकी हैं। पर विनय इस बात का बुरा नहीं मानते। वे इसे अपनी लेखनी की सफलता से जोड़ कर देखते हैं और मूड में होने पर इस कामयाबी के लिए अपनी पीठ खुद ठोंकते हैं।
 
वर्तमान में नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्‍नालॉजी, गाँधी नगर, गुजरात से एम.टेक. का अध्‍ययन कर रहे विनय साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन सहित कई ब्‍लॉगों के तकनीकी सलाहकार के रूप में भी जाने जाते हैं और जरूरतमंद की मदद के लिए हमेशा खुले मन से तैयार रहते हैं। तकनीकी मदद श्रेणी के संवाद सम्‍मान से विभूषित विनय आज के समझदार होते युवा की निशानी हैं। यह युवा रोजगार के लिए भले ही अंग्रेजी माध्‍यम की महत्‍ता को स्‍वीकार करके उसे अपनाने से गुरेज नहीं करता है, पर जहाँ भाषा और राष्‍ट्रप्रेम की बात आती है, वह हिन्‍दी सेवा से पीछे नहीं रहता है।
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