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बस वे दो पल! -एक प्रेरक कथा

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एक आदमी था। उसकी इच्छा थी कि वह दुनिया का सबसे धनवान इंसान बने। इस उद्देश्य से वह विदेश गया। वहां ...

एक आदमी था। उसकी इच्छा थी कि वह दुनिया का सबसे धनवान इंसान बने। इस उद्देश्य से वह विदेश गया। वहां पर उसने अपना व्यापार जमाया और मन लगाकर काम किया। उसकी मेहनत और लगन काम आई और वह बहुत अमीर बन गया। इस कार्य में जीवन के 17 साल कब बीत गये, उसे पता नहीं चला। अब उसे अपने परिवार की याद आई। उसने घरवालों के लिए ढेर सारे उपहार खरीदे और घर की ओर लौट पड़ा।

Real Love
सेठ को रास्ते में एक ज्ञानी मिला। दोनों से एक दूसरे का परिचय हुआ। ज्ञानी ने अपना परिचय देते हुए कहा- ''मैंने दुनिया के महान शास्त्रों का अध्ययन करके ज्ञान के सूत्र जुटाए हैं। हालांकि वे अनमोल हैं, पर मैं उन्हें 500 स्वर्ण मुद्राओं में दे सकता हूं।''

सेठ को लगा कि ये तो बहुत महंगा सौदा है। लेकिन फिरभी उस ज्ञानी से एक सूत्र खरीद लिया। ज्ञानी ने उसे सूत्र देते हुए कहा- कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रूककर सोच जरूर लेना। वर्ना ऐसा भी हो सकता है कि बाद में पछताते भी न बने।'' सेठ ने ज्ञानी को धन्यवाद दिया और सूत्र को अपनी किताब में लिख लिया। 

लम्बी यात्रा के बाद जब सेठ अपने घर पहुंचा, उस समय रात के बारह बज रहे थे। घर पर सारे लोग सो चुके थे। लेकिन बाहर खड़े दरबान जाग रहा था। वह सेठ को देखकर खुशी से चीखने ही वाजा था कि सेठ ने उसका मुंह बंद कर दिया आैर बोला- ''मैं अपने घर वालों को चमत्कृत करना चाहता हूं, इसलिए चुपचाप अंदर जाऊंगा।''

चोरों की तरह कदम बढ़ाते हुए अपनी पत्नी के कक्ष में पहुंचा। पर अंदर का नजारा देखकर उसके पांवों के नीचे की जमीन खिसक गई। पलंग पर उसकी पत्नी एक युवक से लिपट कर सोई हुई थी। यह देखकर सेठ का क्रोध सातवें आसमान पर जा पहुंचा। वह सोचने लगा- मेरी पत्नी इतनी बड़ी धोखेबाज निकलेगा, यह मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। अगले ही पल सेठ ने अपनी तलवार निकाल ली और पत्नी की गर्दन पर उसका वार करने के लिए हाथ उठाया। पर तभी उस ज्ञानी की बात याद आ गयी- कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट सोच लेना... 
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ज्ञानी की बात याद आते ही सेठ के हाथ रूक गयेद्य उसने अपनी तलवार पीछे खींची, तो उसका हाथ बगल की अलमारी में रखे एक बर्तन से टकरा गया। बर्तन गिरने की आवाज से पत्नी की नींद खुल गई। पहले तो वह अपने पति पर को सामने पाकर बहुत ख़ुश हुई, लेकिन फिर हाथ में तलवार, चेहरे पर तमतमाता हुआ गुस्सा देखकर वह सारा माजरा समझ गयी। उसने अपने पास सोए युवक को जगाया- ''बेटा उठ, देख तेरे पिताजी आए हैं।'' मां की आवाज सुनकर वह युवक चौंक कर उठ बैठा और पिता के पैर छूने के लिए झुका। तभी उसके माथे की पगड़ी गिर गयी और उसके चेहरे पर लम्बे बाल बिखर गये।

यह देखकर सेठ एक बार फिर अवाक रह गया। प‍त्नी ने उसकी हैरानी कम करते हुए कहा, ''स्वामी ये आपकी बेटी है। पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए, इसलिए मैंने बचपन से ही इसे पुत्र की तरह पाला है।'' 

यह सुनकर सेठ लज्जित हो उठा। उसने अपनी पत्नी और बेटी को गले से लगा लिया और फूट-फूट कर रोने लगा। साथ ही वह सोचता जा रहा था कि अगर आज मैंने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता, तो मेरे हाथों से कितना बड़ा अनर्थ हो जाता।''

मित्रों, ऐसे ही पल अक्सर हमारे जीवन में भी आते हैं, जब हम क्रोध के आवेश में अनर्थ कर बैठते हैं और बाद में जीवन भर पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं लगता। इसलिए जब भी कभी जीवन में किसी की बात अथवा घटना के कारण आपको क्रोध आए, कोई भी कदम उठाने से पहले उन दो पलों में रूककर सोचिएगा जरूर। हो सकता है कि उस सूठ की तरह आपके भी हाथों से कोई बहुत बड़ा अनर्थ होने से बच जाए और आपके जीवन में उम्मीद के विपरीत प्यार के फूल खि‍ल जाएं।
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बस वे दो पल! -एक प्रेरक कथा
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