‘जिन्‍दगी के मेले’ को यादगार बनाते पाबला जी!

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    ('जनसंदेश टाइम्स', 22 जून, 2011 के 'ब्लॉगवाणी' कॉलम में प्रका...

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 ('जनसंदेश टाइम्स', 22 जून, 2011 के
'ब्लॉगवाणी' कॉलम में प्रकाशित ब्लॉग समीक्षा)
इस दुनिया में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो दीवानगी की हद तक काम करने के लिए जाते हैं। ऐसे लोग लाभ-हानि के गणित से कोसों दूर होते हैं। उन्‍हें नाम की भी परवाह नहीं होती। वे सिर्फ और सिर्फ किसी एक खास मकसद के लिए पैदा होते हैं। उसी के लिए जीते हैं और उसी के नाम अपनी सारी जिंदगी कर जाते हैं। दुनिया के हर कोने में, दुनिया के हर क्षेत्र में ऐसे लोगों की कमी नहीं हैं। संयोग से ब्‍लॉग जगत के पास भी एक ऐसी ही शख्शियत मौजूद है। और उस स्‍वनाम धन्‍य व्‍यक्ति का नाम है बी0 एस0 पाबला।

दल्‍ली राहजरा, भिलाई, छत्‍तीसगढ़ में जन्‍में और वहीं पले-बढ़े पाबला जी भिलाई इस्‍पात संयत्र में सेवारत हैं। वे ब्‍लॉग की दुनिया में 2005 से सक्रिय रहे हैं। उनका मुख्‍य ब्‍लॉग है जिन्‍दगी के मेले (http://bspabla.blogspot.com), जिसे उन्‍होंने 17 सितम्‍बर 2005 को बनाया था और 18 सितम्‍बर को उसकी पहली पोस्‍ट प्रकाशित हुई थी। उन दिनों न तो यूनीकोड फाँट का प्रचलन हुआ था और न ही इंटरनेट पर हिन्‍दी लिखने का कोई अन्‍य तरीका मौजूद था। यही कारण था कि ब्‍लॉग लिखने के लिए कम्‍प्‍यूटर के वर्ड आदि फार्मेट में हिन्‍दी लिख कर उसकी इमेज बनाकर ब्‍लॉग में लगाना पड़ता था। सम्‍भवत: इसी वजह से कुछ समय के बाद ब्‍लॉग जगत से उनका मोहभंग हो गया। लेकिन इसके बावजूद इंटरनेट से जुड़ाव नहीं छूटा। अपने शहर की एक वेबसाइट बनाने के बाद वे 2008 में ब्‍लॉग जगत में पुन: लौटे। और इस बार वे ऐसे सक्रिय हुए कि पूरी तरह से ब्‍लॉग जगत के ही हो कर रह गये।

औपचारिक शिक्षा के नाम पर बी-एस0सी0 के बाद पत्रकारिता में डिप्‍लोमा कोर्स करने के बाद पाबला जी ने अनौपचारिक शिक्षा के रूप से वेबसाइट डिजाइनिंग का ज्ञान अर्जित किया है और उसे ही हिन्‍दी सेवा का माध्‍यम बनाया है। उनके हिन्‍दी सेवा के इस जुनून को कल की दुनिया (http://kalkiduniya.blogspot.com), ब्‍लॉग बुखार (http://blogbukhar.blogspot.com), कम्‍प्‍यूटर सुरक्षा (http://pcsuraksha.blogspot.com) एवं शोध व सर्वे (http://shodh-survey.blogspot.com) ब्‍लॉगों पर भी महसूस किया जा सकता है। इनमें से कल की दुनिया ब्‍लॉग में विज्ञान एवं टेक्‍नालॉजी से सम्‍बंधित शोध परक रिपोर्ट्स और समाचार प्रस्‍तुत किये जाते हैं, ब्‍लॉग बुखार में ब्‍लॉग जगत से जुड़ी हुई तकनीकी जानकारियाँ परोसी जाती है, कम्‍प्‍यूटर सुरक्षा में कम्‍प्‍यूटर को सुरक्षित रखने के तरीके बताए जाते हैं और शोध व सर्वे में जनोपयोगी एवं रोचक जानकारियों को प्रकाशित किया जाता है। इसके अलावा भी उनके कई अन्‍य ब्‍लॉग हैं, जिन्‍हें उनकी गूगल प्रोफाइल (https://profiles.google.com/bspabla) पर देखा जा सकता है।

पाबला जी हिन्‍दी सेवा का जुनून लेकर पैदा हुए हैं। उनका मानना है कि इस समाज ने आपको बहुत कुछ दिया है। इसलिए आपका भी दायित्‍व बनता है कि आप उसके लिए कुछ सोचें और करें। वे अपनी इस धारणा को सिर्फ कथनी ही नहीं, बल्कि करनी में भी उतारते हुए नजर आते हैं। और उनकी करनी का प्रत्‍यक्ष प्रमाण हैं हिन्‍दी की चार चर्चित वेब साइटें: ब्‍लॉग गर्व (http://bloggarv.com), ब्‍लॉग मंच (http://www.blogmanch.com), ब्‍लॉग मंडली (http://www.blogmandli.com) एवं ब्‍लॉग्स इन मीडिया (http://blogsinmedia.com)। 

इनमें से ब्‍लॉग गर्व एक ब्‍लॉग डायरेक्‍ट्री है, ब्‍लॉग मंच ब्‍लॉगर्स की समस्‍याओं के निस्‍तारण के लिए बनाया गया ऑनलाइन फोरम है, ब्‍लॉग मंडली विभिन्‍न ब्‍लॉगों की ताजी प्रविष्टियों को दिखाने वाला एक ब्‍लॉग एग्रीगेटर है और ब्‍लॉग्स इन मीडिया प्रिंट मीडया में प्रकाशित ब्‍लॉग पोस्‍टों को एक जगह सजोने वाली वेबसाइट। लेकिन इन सभी वेब साइट्स में कहीं पर भी न तो बी0 एस0 पाबला का नाम दर्ज है और न ही उनकी फोटो। इससे उनकी निस्‍वार्थ भावना भलीभांति समझी जा सकती है। लेकिन एक सुखद आश्‍चर्य का विषय यह है कि सिर्फ इतने से उन्‍होंने संतोष नहीं किया है। वे बताते हैं कि इन्‍टरनेट पर हिन्‍दी के विकास के लिए समर्पित वे 7 अन्‍य बेवसाइट्स पर भी काम कर रहे हैं और ये सभी सातों वेबसाइट्स इसी साल ऑनलाइन हो जाएँगी।

इन्‍टरनेट पर हिन्‍दी की समृद्धि के लिए समर्पित पाबला जी ब्‍लॉग संरक्षक श्रेणी के संवाद सम्‍मान से सम्‍मानित हैं। वे  एक सरल एवं खुले दिल के आदमी हैं, लेकिन साथ ही संकोची भी। वे हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। उनकी इन्‍टरनेट और विशेषकर ब्‍लॉग जगत के लिए किये गये कार्य को देखते हुए अगर उन्‍हें ब्‍लॉग मैन की उपाधि से नवाज़ा जाए, तो शायद यह उनके कार्यों का सटीक मूल्‍याँकन होगा। काश, आज की युवा पीढ़ी उनके इस हिन्‍दी प्रेम से कुछ सीख ले पाती, तो इससे न सिर्फ इंटरनेट पर हिन्‍दी का भविष्‍य उज्‍जव हो पाता, वरन उनकी जिंदगी के मेले भी सार्थक हो जाते।
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‘जिन्‍दगी के मेले’ को यादगार बनाते पाबला जी!
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